खुद को सरल-स्वीकार्य बनाएं

खुद को सरल-स्वीकार्य बनाएं

मुश्किल भरी राह जीवन की,
आओ कुछ आसान बनाएं।
कुछ तुम सीधे, कुछ हम ढीले,
एकदूजे का सम्मान बढ़ाएं।।
बच्चों की सीटी सा निश्छल,
दे चेतावनी! इन्हें जगाएं।

अंधेरे की चादर ओढ़े,
सूरज थका पड़ा अचेतन।
चीर अंधेरा निकल पड़े वो,
स्वर्ण – किरणों पे धार लगाएं।

वह है तेरा! यह है मेरी!
तेरा – मेरी, तेरामेरी ।
विचारों की ऐंठन तज हम,
खुद को सरल-स्वीकार्य बनाएं।

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रचनाकार

Author

  • आलोक कुमार

    You are rich in the talent of expression and deep understanding of scientific, socio-economic, political, historical and literary fields etc. Copyright@आलोक कुमार / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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