गुमसुम उदास सी बैठी क्यों तुम गीत कोई तो सुनाओ ना
खिला के चारों ओर सुगंधित उपवन को महकाओ ना
ना हो जाए धुंधली ज्योति नैनो को दिखलाओ ना
कैसा तेरा रंग रूप अब तो मुझ को समझाओ ना
उद्देश्य तेरा आने का क्या है मुझको तो बतलाओ ना
भरा है राग द्वेष दिल में जो उसको तो सुलझाओ ना
कठिन सी लगती राह जगत की कुछ तो राह दिखाओ ना
कब तक प्यासा रहूं यहां पर अब तो प्यास बुझाओ ना
रहू उम्र भर जिसमें डूबा प्रेम वही दिखलाओ ना
उबड खाबड बहती हो तुम सागर में मिल जाओ ना
डूबा के भावो में ही सबके दिल में भाव जगाओ ना
मझधार पड़ी नौका मेरी अब तो उसे डुबाओ ना
स्वप्न देखता रहूं मै कब तक सत्य उसे कर जाओ ना
दिखला कर के सुखद नजारा दिल को अब तड़पाओ ना
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


