होता उसका जीवन निर्मल जिसकी सोच सही होती है
अगर सोच हो सकारात्मक जीवन में खुशियां भरती है
गलत सोच रखकर के मन में काम यहां जो करता है
दुख मय जीवन होता उसका सदा ही राह भटकता है
कर्म तुम्हारा गलत दिशा में आज अगर मुड जाएगा
धन दौलत को पाकर भी तू चिंतित ही रह जाएगा
कर्म करो तुम समय से पहले भाग्य से ज्यादा नहीं मिलेगा
हुआ अगर संतोष तुझे तो सब तुझको पर्याप्त मिलेगा
जितना मिला यहां तुझको गर् उतने में संतोष नहीं
पूरी दुनिया मिल जाए फिर भी यह जीवन सफल नहीं
मिला है जितना यहां पे तुझको उतने में खुश रहना सीखो
आसमान पर उडो नहीं तुम धरती पर ही जीना सीखो
संतोष त्याग कर लालच में ही आज अगर फस जाएगा
मन में त्रिष्णा भरेगी तेरे प्यासा ही रह जाएगा
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


