हर एक मुस्कुराहट पहचान लेंगे हम
गम है छुपा या खुशी इसको जान लेंगे हम
कितना भी छुपाओ इसे अब दिल में रखकर तुम
क्या चल रहा है मन में तेरे जान लेंगे हम
गम भरी खुशियां भरी है या दिखावा है
आंखों के आंसुओं को भी पहचान लेगे हम
जान करके इतना ना अनजान बनो तुम
कितना करो बहाना फिर भी जान लेंगे हम
दिल में उमड़ती भावना यूं ना दबाओ तुम
दिल में उमड़ती भावना भी जान लेंगे हम
आंखों की राह घुस के दिल में बस गए हो तुम
धड़कन को अपनी सुनकर ही पहचान लेंगे हम
एक बार अपने नैनो का ही तीर चला दो
फसते हैं कैसे जाल में यह जान लेंगे हम
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


