अनुराग का बाग लगे हिरदयं
जिसमें नित झूल रहीं हैं बेटी।
नित नूतन कुसुमित पल्लवित हों
दुःख दर्द को भूल रहीं हैं बेटी ।।
बड़े भाग्य सानिध्य हैं प्राप्त प्रिये
हर स्थिति में अनुकूल हैं बेटी ।
जीवन का सबक सिखाने के हेतु
ये प्रतीत हुआ स्कूल हैं बेटी
अनुराग का बाग लगे हिरदयं
जिसमें नित झूल रहीं हैं बेटी।
नित नूतन कुसुमित पल्लवित हों
दुःख दर्द को भूल रहीं हैं बेटी ।।
बड़े भाग्य सानिध्य हैं प्राप्त प्रिये
हर स्थिति में अनुकूल हैं बेटी ।
जीवन का सबक सिखाने के हेतु
ये प्रतीत हुआ स्कूल हैं बेटी

श्री राम जानकी मंदिर, पुरानी दाल मंडी केसा के सामने, केनाल रोड कानपुर,Copyright@राम सहारे मिश्र/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |