धन दौलत का अहंकार पथभ्रष्ट तुझे कर जाएगा
खून पसीने की मेहनत जब लूट किसी का जाएगा
खून पसीने की दौलत को हडप अगर तुम जाओगे
छीन कमाई खून की उसको कष्ट अगर पहुंचाओगे
जब आह उठेगी उसके दिल से करुण कराह उठेगा
नहीं बचा पाएगा कोई ओ तुझे नष्ट कर जाएगा
तब विचलित होगा तेरा मन हर ओर उदासी छाएगी
सुख भरी तुम्हारी रातों में भी नींद तुझे ना आएगी
अभी समय है जल्दी जागो अभिमान कर तुम अब त्याग करो
दुखी ना हो अब जग में कोई इसका आज उपाय करो
यह जीवन होगा फलीभूत जब अहंकार छठ जाएगा
होगा विचार उत्तम तेरा फिर हरदम ही सुख पायेगा
अहंकार जो छुपा है मंन मे उसको दूर भगाओ तुम
मेल मिलाप कराके सबसे सबको गले लगाओ तुम
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


