जगत की शान है हिंदी मेरा अभिमान है हिंदी
हमारी मातृभाषा देश की पहचान है हिंदी
हुआ है जन्म संस्कृत से संस्कृति की जो पोषक है
भरा जिसमें है सब रस गुण उसी की खान है हिंदी
भरे सम्मान गरिमा दिल करे पावन सा जो तन मन
हृदय की हर उमडती भावना का भान है हिंदी
भरी सागर सी गहराई है इसके वर्ण अक्षर में
हमारे ज्ञान की व्यवहार की पहचान है हिंदी
है भाषा भव्य भारत की जणित श्रृंगार रत्नो से
सतत करता प्रकाशित जो ओ ज्योतिर्मान है हिंदी
करे जो भाव गुंजित मन हिलोरे मार कर दिल में
सजग प्रहरी सा बन रक्षा करें सद्भाव है हिंदी
लिखे जो भी वही बोले न कोई भेद है इसमें
भरी जिसमें है ये खुशबू ओ चंदन दीप है हिंदी
मिला लेती है जब सुर ताल को भावो में खोकरके
करे झंकृत जो तन मन को ओ वीणा तार है हिंदी
विलक्षणता भरी कितनी है आभा कितनी मौलिकता
दिलों में भर दे जो उत्सव वही त्यौहार है हिंदी
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


