जिंदगी है एक नदी जो हर दम ही बहती रहे
जिंदगी एक शाम सी जो रोज ही ढलती रहे
जिंदगी तो धूप सी जो रोज ही तपती रहे
जिंदगी है एक नशा मदहोश सी करती रहे
जिंदगी तो एक खुशी है जो सदा मिलती रहे
जिंदगी तो छांव सी जो शीतलता देती रहे
जिंदगी वरदान है जो सब को ही मिलती रहे
जिंदगी तो ईश्वर जैसे रूप में दिखती रहे
जिंदगी एक प्रेम है जो सब को ही मिलती रहे
जिंदगी है एक कली जो रोज ही खिलती रहे
जिंदगी एक शिक्षा है जो उम्र भर मिलती रहे
जिंदगी एक फूल सी जो सदा महकती रहे
जिंदगी है एक खिलौना उम्र भर खेलती रहे
जिंदगी एक स्वप्न सी जो उम्र भर दिखती रहे
जिंदगी एक जंग नई जो रोज ही करती रहे
जिंदगी एक लहर सी उठा पटक करती रहे
जिंदगी एक सुबह सी चैतन्यता भरती रहे
जिंदगी तो सूर्य जैसी रोज उदित होती रहे
जिंदगी सुख दुख का संगम सब को डुबोती रहे
जिंदगी एक प्यास है जो उम्र भर प्यासी रहे
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


