
एक महिला से हर रिश्ता
एक महिला जिससेहर रिश्ता बुनियादी हैजो बचपन की गुरु हैऔर ममता की फरियादि हैमहिलाओं का सम्मानफ़र्ज है हमारायही सबक सबकेलिए मर्यादी हैदिलों पर पहलाअधिकार माँ

एक महिला जिससेहर रिश्ता बुनियादी हैजो बचपन की गुरु हैऔर ममता की फरियादि हैमहिलाओं का सम्मानफ़र्ज है हमारायही सबक सबकेलिए मर्यादी हैदिलों पर पहलाअधिकार माँ

इतिहास ने दिया है , गवाही समाज हित , नारियों के द्वारा दिए , पुण्य योगदान की । एकता के सूत्र में जो , बांधी

खुशी –खुशी से मेरीजिंदगी गुजार देनादुख आए तो हे ईश्वर !मुझे निकाल देना । ये जिंदगी गम का मारा हैलूट गया सारा हैअब तू ही

चल मनोरमे एक उम्र पूरा हुआ।। अब दूसरे की दुआ राम से माँगने चले।अपने मित्रों के साथ चैतावर गाने चले।अपने- अपने बिटिया रानी,के नयनो में,राधा

रूढ़िवादिता को खंडित करतीआज की आधुनिक नारी हूँ मैं,मान मर्यादा की इज्जत रखतीसुदृढ़ और संस्कारी हूँ मैं.! त्याग,समर्पण,सहनशीलता सेमिटा देती मैं ख्वाईशें अपनी,दूसरों की खुशियों

है नारी जग की क्यारीजीवन उसकी न्यारी न्यारीरखती सबका ख्याल हैजीवन सवारी सवारी दायित्व परिवार कावंश और घरवार कारिश्ते में लाती मिठास हैयह दस्तूर है

अपने सपनों में सेअपनों के सपनों को बीन-बीन कर निकालती है।स्त्री कुछ ऐसी ही रची गयीजिन पे छत टिकी, उन दीवारों को संभालती है। कहाँ

खुशी –खुशी से मेरीजिंदगी गुजार देनादुख आए तो हे ईश्वर !मुझे निकाल देना । ये जिंदगी गम का मारा हैलूट गया सारा हैअब तू ही

सुन री मनोरमे, अपना नव वर्ष मनना है। सुन मनोरमे राम का नाम है, बड़ा मंगलकारी। पत्थर को भी, द्रवित कर दे, राम नाम चमत्कारी।

स्त्री लिखती है तो लगता है पूरी प्रकृति और संवेदना की आत्मा तक को संवाद करने की राह मिल जाती है स्त्री जब लिखती है