
दिल ने तुम्हें पुकारा
दिल ने तुम्हें पुकारा है सरकारे-दो जहां आओ मिरी मदद को ए मुख़्तारे-दो जहां मँझधार में किनारा दिया आपने सदा आये हो बनके आप ही

दिल ने तुम्हें पुकारा है सरकारे-दो जहां आओ मिरी मदद को ए मुख़्तारे-दो जहां मँझधार में किनारा दिया आपने सदा आये हो बनके आप ही

विगत वर्षों में खोए हमने , अपने बहुत से मित्र । रह गए उनसे रिश्ते फीके , जो थे हृदय में बैठे नीके । छुपाए

जबसे हुए हैं शिक्षित, ताजा विचार आयापरिपाटिया भी हमको, दिखने लगी छलावामाया का जाल ऐसा, कोई नहीं किसी काहर आदमी अकेला, हर चेहरा अजनबी साबाहर

आया है नव वर्ष, लोगों में लेकर नई उम्मीद नया जुनून और नई आशा ।। आया है नव वर्ष , दूर करने अकर्मण्यता दिलाने सफलता

हिज्रे तन्हाई शब गुजारी है। आ भी जाओ के अब तैयारी है। शुक्रिया कहूं तो मैं कैसै कहूं, अभी उनकी बहुत उधारी है। दिल तो

तनहा तनहा सफ़र लगने लगा है। दिले नादान क्या कहने लगा है।। गये क्या बज़्म से वो रूठ करके, इक दरिया अश्क का बहने लगा

करले तू इस जगत में सद्व्यवहार एक दिन। जाना पड़ेगा छोड़कर संसार एक दिन।। विषयादि त्रिगुण फंद अविद्या विकार में, स्व ढका मन बुद्धि चित्त

आजकल मुस्कराने लगे हैं कुचल कर फूल सा दिल मेरा वो, आजकल मुस्कराने लगे हैं। जिनसे मतलब नहीं था कभी भी, उनकी

ऐषणाओं के सघन घन और जीवन। आनुषांगिक भी न हो पाया अकिंचन और जीवन। शांत पानी इतने कंकड़। अंधड़ों की पकड़ में जड़, आत्मा ह्रासित

पौरुषता हरियाली का नाम ही किसानी थी l आज मैं बूढ़ा बैल हूँ कभी जवानी थी ll निर्धनता घर में थी श्रम से उसे उबार