पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

पुत्री

गुलाब की कली के समान उत्पन्न होती है पुत्री और खिले फूल की भाँति महकती है पुत्री उपवन में सभी को आकर्षित करती है पुत्री

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कविता

 भूल बैठे हैं

आज भूल बैठे हैं हम मूल्य इस दिन का। इसे लूटो उसे लूटो क्रम नित दिन का। राष्ट्र चिंतन हित में कोई लगता नहीं, श्वेत

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कविता

हमारी हर पंक्ति में

अगर एक दिन तुफान आयासभी लोग परेशान होंगेकोई बचायेगा खुद कोतो कोई अपनी गृहस्थी कोकुछ लोग तो भगवान का नाम लेंगेताकि टल जाए आया हुआ

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कविता

मोहब्बत का नक्शा

इश्क का भ्रमण भीबहुत लम्बा हो गया हैअधिकतर लोगो कोगुम हो जाना ही होता हैअपनी मोहब्बत मेंकभी यह न जान पातेकी आगे और कितना जाना

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