
अपनेन बूते मंगलसूत(अवधी कविता)
आगे बढिगा ढेरि जबाना अंगुरी आजी बाबक् छूट अम्मा बप्पक कहेम चलत हैं कहां बताओ बिटिया पूत अंगरेजी कै यहै पढाई परमपरा का लइगै लूट

आगे बढिगा ढेरि जबाना अंगुरी आजी बाबक् छूट अम्मा बप्पक कहेम चलत हैं कहां बताओ बिटिया पूत अंगरेजी कै यहै पढाई परमपरा का लइगै लूट

कवन, बिधि करू, मुकुन्द हम, तोड़ बड़ाई,कबहुं, प्रेम, कभी करू, लड़ाई,तोड़ प्रीति, सुनु हरजाई,मोरे मन ही मन मे, हेराई।। अब, करहु सनाथ, राम रघुराई।हे, अ

हम ने दमन, बचाने, की बड़ी, कोशिशें की मुकुन्द,पर, उन्होंने दामन, न छोड़ा, कभी चलते चलते,वो जो, शामिल रहे, मेरे मरने, की ज़िद में,मुकुन्द, ख़ुदा

आईना बता तू ये क्या सिलसिला है हूं मैं क्या, क्या तू बता रहा है मुझसे क्या पूछते हो तेरे कर्मों का सिला है जो

दुनिया में नाम वतन का रहेगा रहें ना रहें हम जतन ये रहेगा करके जाऊं कुछ ऐसा जमाना नाम जपेगा वीर सपूत दुनिया में रहेगा

माँ मुझे बोझ मत समझो मैं भी अंश तुम्हारा हूँ अजन्मा ही मत मारो मुझको मैं भी खून तुम्हारा हूँ माँ हो मेरी फिर साथ

जब तक दूध दिहिन भर लोटा तब गइया रहीं हमार साल पूर भा बिचुख गईं जब राति गईं नदिया वहि पार यनहूं हांकैं उनहूं हांकै

मैंने कभी नहीं चाहाकि तुम संपूर्ण जीवन समर्पित करोसिर्फ चंद खुशियों के लिएमैंसिर्फ तुम्हारा एक पल चाहता हूं।उसी पल में जीना चाहता हूंसंपूर्ण जीवनअधरों पर

चाहते तो तुम भी होकि आपके बायें बैठने वालीआपकी ताकत बनेकमजोरी नहीफिर क्यों करते हो दिखावासबके सामनेमुझे जलील करने कामुझे शर्मिंदा करने कासाथ न देने

सौन्दर्य भरा जीवनव्यतीत कर रहा एक बच्चाभवन का मालिक समझता खुद कोजब मां लाती है दूध का ग्लासतो फेक देता है बिना सोचे समझेमां के