पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

भारतम!

हम भारत के सच्चे बच्चे,हार न मानें अच्छेहमें है जीना ,आगे बढ़नायही अरमान है हमारा हम मिट जाएंगे पर ,वतन झुके न हमारामरकर भी मेरा

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कविता

कविताएँ

मैंने कविताओं को मरते देखा।उस वक्त देखा,जब यह अन्याय के खिलाफ लिखने की सोचती है ।हजारों बार तो यह रात कोसिरहाने बैठकर घंटों तक रोती

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कविता

रोटियाँ

लोरियाँ सुनने की इच्छा जागृत जब भी हुई,तब हमें रोटियों की भूख सताती रही।हमें चॉंद दिखाकर लोरियाँ मत सुनाओ,हमें आवश्यकता है सुरज ढलते ही रोटियों

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कविता

सृजन

यदि तुम्हें बीज मेंवृक्ष दिखाई देता है,तो तुम्हें चलते रहना चाहिए। तुम्हारे रास्ते में देहशंकु की भांतिकुछ ऐसी बाधाएं भी आएगी,जो तुम्हें विचलित कर देगी,मगर

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कविता

एक ऐसा घर बन जाए मेरा

एक ऐसा घर बन जाए मेराजिसमें सब का ठिकाना होएक तरफ दुकान हो मेरीसामने मेरे शिवाला होप्रेम मिले सबका ही मुझकोअहंकार ना उपजा होकभी बंद

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