पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

रूह में मिलने का इरादा बहुत ज्यादा था

रूह में मिलने का इरादा बहुत ज्यादा था खुद को योग्य समझूं ये नासमझी बहुत ज्यादा था । मिले थे जिस कदर जिन यादों ने

विस्तार से पढ़ें »
कविता

आज महफिल दिलों की सजा लीजिए

आज महफिल दिलों की सजा लीजिएअपने दिल की उदासी मिटा दीजिएकोई गम ना रहे अब किसी बात काआज जी भर के तुम मुस्कुरा लीजिएकोई साथी

विस्तार से पढ़ें »
कविता

सुनता रहा मैं

सुनता रहा मैं उसकी बोला न ताव में,हर मोड़ पर रहा मैं उसके प्रभाव में।फिर भी मिली है मुझको दर्दे जुदाइयां,जाने वही क्या चल रहा

विस्तार से पढ़ें »
कविता

मैं अपनी दुनिया सौंप दूं

मैं अपनी दुनिया सौंप दूं तेरे हाथों में।मिटा तो ना दोगे तुम।।अगर इजहार कर दूं अपनी मुहब्बत का।तमाशा बना तो ना दोगे तुम।।जख्म कई लिए

विस्तार से पढ़ें »
कविता

निगाहें वहां पर हो

निगाहें वहां पर हो जहां होंसले पस्त होते हैं।चिराग वहां जलाओ जहां सूरज अस्त होते हैं।।क्या लेना दुनियादारी की चापलूसी से।जो साफ दिल होते हैं

विस्तार से पढ़ें »
कविता

ऋतुराज बसंत मनभावन

चढ़ल बसंती रंग धरा ज्यों, मन में भईल तरंग।लहेलहे लहेके सरसों फुलवा , कोईल करे उमंग।रितु बासंती आवत बाटे , गछिया करे बयान ।गीत मनोहर

विस्तार से पढ़ें »
कविता

मुझसे शादी करोगी?

प्रेम में भावुक हो रहा हूं मैंअपना ईमान दोगी ?प्रेम में पागल हो रहा है मेरा दिलमुझसे शादी करोगी ? तू जच रही है मेरे

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!