
गौरा के संग विराज रहे हैं
शीश जटा और चंद्र विराजे गले भुजंग लपेटे हुए हैं माथे पे हैं जो त्रिनेत्र विशाल उसी से सभी को निहार रहे है कान में

शीश जटा और चंद्र विराजे गले भुजंग लपेटे हुए हैं माथे पे हैं जो त्रिनेत्र विशाल उसी से सभी को निहार रहे है कान में

बाबा बेलखरनाथ का है मंदिर यहां दिव्य बना आओ सब भक्त मिल पूजा यहां कर ले दक्षिण में कुछ दूरी बहती सई नदी है कर

रूह में मिलने का इरादा बहुत ज्यादा था खुद को योग्य समझूं ये नासमझी बहुत ज्यादा था । मिले थे जिस कदर जिन यादों ने

इस कदर न मदहोश हो, तुम्हे प्यास लग जाएगी हर सांसे हो मदहोश हवा प्यार की छटा लहराएगी। ये प्यार का नाटक नही , ये

आज महफिल दिलों की सजा लीजिएअपने दिल की उदासी मिटा दीजिएकोई गम ना रहे अब किसी बात काआज जी भर के तुम मुस्कुरा लीजिएकोई साथी

सुनता रहा मैं उसकी बोला न ताव में,हर मोड़ पर रहा मैं उसके प्रभाव में।फिर भी मिली है मुझको दर्दे जुदाइयां,जाने वही क्या चल रहा

मैं अपनी दुनिया सौंप दूं तेरे हाथों में।मिटा तो ना दोगे तुम।।अगर इजहार कर दूं अपनी मुहब्बत का।तमाशा बना तो ना दोगे तुम।।जख्म कई लिए

निगाहें वहां पर हो जहां होंसले पस्त होते हैं।चिराग वहां जलाओ जहां सूरज अस्त होते हैं।।क्या लेना दुनियादारी की चापलूसी से।जो साफ दिल होते हैं

चढ़ल बसंती रंग धरा ज्यों, मन में भईल तरंग।लहेलहे लहेके सरसों फुलवा , कोईल करे उमंग।रितु बासंती आवत बाटे , गछिया करे बयान ।गीत मनोहर

प्रेम में भावुक हो रहा हूं मैंअपना ईमान दोगी ?प्रेम में पागल हो रहा है मेरा दिलमुझसे शादी करोगी ? तू जच रही है मेरे