
स्त्री लिखती है तो आकाश उतर आता है
स्त्री लिखती है तो लगता है पूरी प्रकृति और संवेदना की आत्मा तक को संवाद करने की राह मिल जाती है स्त्री जब लिखती है

स्त्री लिखती है तो लगता है पूरी प्रकृति और संवेदना की आत्मा तक को संवाद करने की राह मिल जाती है स्त्री जब लिखती है

आज अपने दिलों को मिला लीजिएफिर ये धड़कन दिलों की मिले ना मिलेक्या पता कौन जाने कहां खो गयाजिंदगी में दोबारा मिले ना मिलेनफरतों से

मैंने तेरे लिए है जहां छोड़ दी, जहां के लिए छोड़ तुम हो रहे। कैसे कह दूं सही कौन है इस जगह तुमको पाने की

खाली हाथ रह जाता हूं मैंमिलती नही है माजिलबदनाम हो जाता हूं मैंमिलती नही है मंजिल। इस दुनिया में हमाराक्या औकात रहा ?हार जाता हूं

बगिया में प्रेम के दो फूल खिलते देखा था ।प्रेम के उन्माद में पत्थर मचलते देखा था ।जीवन को हरपल तिरस्कार करनेवालेमौत की आंखों मेंजीवन

है जिंदगी तू बनू कहानी में सुनती रहे तू ऐसी बानी मैं गुन -गुनाऊ मैं बन जाए गीत तू साज हो धड़कन मेरी हो जाए

आई थी बहार साखों पर,कली कली मुस्काई थी, हरे रंग की चादर ओढ़ के,पात_पात इतराई थी ओस की बूंदे गिरी पातों पर,तरु की सोभा बढ़ाई

आज गुलाब बहुत घबराया है, सोंचता है क्यूं सुगंध पाया है। जन्म से कांटे रहे साथ में, उम्र भर बस दर्द ही पाया है।। फिर

तू जानता है तुझे मैं भुला नहीं सकता मैं आरज़ू का क़िला ख़ुद ढहा नहीं सकता करे तू लाख सितम या मुझे फ़ना कर दे

दुलहा माडौ से लउट परा जब जानिस अब न कार मिली न मिली अंगूठी हीरा कै न सिकडी रसरीदार मिली मान मिला सम्मान मिला कठरा