पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

स्त्री लिखती है तो आकाश उतर आता है

स्त्री लिखती है तो लगता है पूरी प्रकृति और संवेदना की आत्मा तक को संवाद करने की राह मिल जाती है स्त्री जब लिखती है

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कविता

प्रेम के रास्ते

आज अपने दिलों को मिला लीजिएफिर ये धड़कन दिलों की मिले ना मिलेक्या पता कौन जाने कहां खो गयाजिंदगी में दोबारा मिले ना मिलेनफरतों से

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कविता

मिलती नही है मंजिल

खाली हाथ रह जाता हूं मैंमिलती नही है माजिलबदनाम हो जाता हूं मैंमिलती नही है मंजिल। इस दुनिया में हमाराक्या औकात रहा ?हार जाता हूं

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कविता

बगिया

बगिया में प्रेम के दो फूल खिलते देखा था ।प्रेम के उन्माद में पत्थर मचलते देखा था ।जीवन को हरपल तिरस्कार करनेवालेमौत की आंखों मेंजीवन

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गज़ल

एहसास

है जिंदगी तू बनू कहानी में सुनती रहे तू ऐसी बानी मैं गुन -गुनाऊ मैं बन जाए गीत तू साज हो धड़कन मेरी हो जाए

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कविता

पुष्प और कांटे

आज गुलाब बहुत घबराया है, सोंचता है क्यूं सुगंध पाया है। जन्म से कांटे रहे साथ में, उम्र भर बस दर्द ही पाया है।। फिर

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