कविता

Category: कविता

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पालना है प्रकृति का सभी के लिए

है प्रकृति का संवरना तो सबके लिएलाभदायक है पूरे जगत के लिएआओ सिंगार मिलकर प्रकृति का करेंबिखरी आभा प्रकृति की तो सबके लिएचांदनी रात शीतल

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जिंदगी ख्वाब है

जिंदगी ख्वाब है इस ख्वाब में क्यों जीते होजिंदगी प्याला गरल का इसे क्यों पीते होजितना जीवन में मिला उसको ही पूरा समझोऔर पा जाऊं

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बात करते नहीं

आजकल आप क्यू बात करते नहींकितना मुझसे तेरा फासला हो गयागांठ दिल में तेरे ऐसी क्यू पड़ गईआज मैं भी पराया सा दिखने लगातूने मुझको

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अमावस (दीपावली )

आज अमावस रात अंधेरी उस पर दीप जलाएंगेकरके उजाला इस जग में हम दूर अधेरा भगाएंगेसब कुछ जगमग जगमग करके मन का भाव जगायेंगेरोशनी की

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दिल में उजाला होता

गर तेरा भाव मेरे भावो में डूबा होतामाधुरी रात बनके दिल में उजाला होताकभी ना देखता मैं आसमा के चंदा कोदिल में चेहरा तेरा गर

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हे जिंदगी

गुमसुम उदास सी बैठी क्यों तुम गीत कोई तो सुनाओ नाखिला के चारों ओर सुगंधित उपवन को महकाओ नाना हो जाए धुंधली ज्योति नैनो को

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शरद पूर्णिमा

आज पूर्णिमा के अवसर पर गंगा के स्नान सेपावन ये जीवन हो जाए तन मन भीगे भाव सेगंगा की लहरें जब उठती मन में हिलोरें

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नजर आते हैं

बीते लम्हों को कभी याद जो मैं करता हूंथकी आंखों में मेरे अश्क नजर आते हैंनहीं छुपा के रखता बात जो भी दिल में कभीखुली

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जिंदगी

जिंदगी है एक नदी जो हर दम ही बहती रहेजिंदगी एक शाम सी जो रोज ही ढलती रहेजिंदगी तो धूप सी जो रोज ही तपती

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आज से बस मेरी हो

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

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