
कोई अपना हो ना सका
हमने तो उसे निहारा रात दिनजिंदगी में कभी जो मिल ना सकामिल गया था जिंदगी में जो मुझेपाके उसको कभी खुश हो ना सकाजिंदगी भर

हमने तो उसे निहारा रात दिनजिंदगी में कभी जो मिल ना सकामिल गया था जिंदगी में जो मुझेपाके उसको कभी खुश हो ना सकाजिंदगी भर

कुछ कहना है बहुत अरसे से बेताब हैं दिल कोई लफ्ज़ नहीं जो हिम्मतवर बनकर अपनी बात कह दे कोई संकेत नहीं जो नित्य मन

तमसो मा ज्योतिर्गमय तम से प्रकाश की और ले जाने की अभ्यर्थना । प्रकाश नैराश्य के विरुद्ध प्रबल उत्साह का संघोष है । मन का

लाए उद्धव एक चिट्ठी श्री कृष्ण की, गोपियों को लगा पत्रिका है प्रेम की । खोजने लगीं नाम उसमें अपना – अपना , सत्य जानकर

प्यास जग की है बहुत कितना पियो बुझती नहींजो लगी है दिल में सबके आग वह बुझती नहींप्यास है जग को सुरा की मेघ से

चिंता मत कर असफलता की मत पछताओ जीवन मेंजीवित रहना व्यर्थ है जब संघर्ष न हो इस जीवन मेंजीवन है दो दिन का मेला हंस

ना हम होंगे ना तुम होगे नहीं कोई गिला होगासिमटती याद का ही बस यहां पर सिलसिला होगाचलो हंस कर बिता ले जिंदगी को जो

जिस दिन जिंदगी की शाम हो जाएगीसब रोते ही रहेंगे कहीं खुशी ना नजर आएगीलगेगा सूना सूना सा ए सारा जमानाबहार की रुत भी खिजा

देखा मैंने सागर को जब तेरे इन दो नैनो मेंभाव मेरा तो भावुक होकर डूब गया तेरे नैनो मेसागर में क्या गहराई होगी जितना तेरे

धन दौलत का अहंकार पथभ्रष्ट तुझे कर जाएगाखून पसीने की मेहनत जब लूट किसी का जाएगाखून पसीने की दौलत को हडप अगर तुम जाओगेछीन कमाई