
छिप छिप के तीर
छिप छिप के तीर दिल पे चलाते हो किसलिए यूँ दुश्मनी मेरे से निभाते हो किसलिए जाना ही है तो पास ही आते हो किसलिए

छिप छिप के तीर दिल पे चलाते हो किसलिए यूँ दुश्मनी मेरे से निभाते हो किसलिए जाना ही है तो पास ही आते हो किसलिए

दूर तुमसे हम हैं क्यूँ दुख भरे आलम हैं क्यूँ पल ख़ुशी वाले बता हो गए बेदम हैं क्यूँ बाँटते हैं जो हँसी आँखें उनकी

तसब्बुर में तेरे रहा उम्र भर न पूछो कि क्या क्या सहा उम्र भर हरिक मोड़ पर इस जहां ने मुझे है पागल दीवाना कहा
भारत के रखवाले हैं अलवेले है, मतवाले है । पाकिस्तान को हरा कर के, हम बंगलादेश बनाने वाले है ।। मुठ्ठी में तुफां रखते हैं,
सबसे शीतल सबसे पावन, गंगा मां है धार तुम्हारी, तेरे चरणों का मैं सेवक, तुम जग की तरण हारी, कोई भागीरथी कहता है, कोई सुर

कट कर शीश गिरे धरा पर, लेकिन रूंड करै तलवार । मृत्यु से भी जो लड़ बैठे, ऐसा दिवला का राजकुमार ।। बावन गढ़ के

पीली पीली सरसो फुलाके यहां चारों ओरपूरे इस जहां के हर दिल में ही छाई हैइसी के बगल में ही मटर भी फुलाई हुईछोटे श्वेत

बस गए जो दिल में आके दिल के वही मीत थेदिल से जो निकल गए वो ढोंग के प्रतीक थेस्वार्थ भाव जब उगा भावना के

तुम अपने आप को पहचानो,सही गलत में अन्तर जानो ।तुम नहीं किसी से निम्न हो,खुद को न कभी दुर्बल मानो ।। मन में यदि संकल्प

एक आवाजपुकार बन उभरीतो हजारों कदमकारवां बन जुड़ गएआग्रह शांत और विनीत थातो क़दमों का शोरसुरीली लय बन गयानारों में सच की आत्मा थी तोघनघोर