पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

गज़ल

कुछ गजलें

मेरी ये बात लोगों को नहीं भाती कि मैं अक्सर, जो वाबस्ता हो तुझसे ऐसा क़िस्सा छेड़ देता हूँ। ये दुनिया वाले ऐसे ही मुझे

विस्तार से पढ़ें »
पद्य-रचनाएँ

कुछ और(गज़लें)

इन आँखों को रुलाने का मज़ा कुछ और होता है, ख़ुदा से ख़ौफ़ खाने का मज़ा कुछ और होता है। हमारी ये ग़लत फ़हमी रुलाती

विस्तार से पढ़ें »
पद्य-रचनाएँ

हुकूमत की गोद में

इन मुन्सिफ़ों की जेब में कितनी मलाई है, हैं दफ़्न सारे राज़ अदालत की गोद में। अब फ़ैसला कहाँ से मेरे हक़ में आएगा, इन्साफ़

विस्तार से पढ़ें »
कविता

प्रतिभा संग नैतिकता हो

परिवर्तन हो सुखद सादगी परख गुणो की व्यापकतायश फैले उत्कर्ष लेखनी प्रतिभा संग हो नैतिकताप्राप्त करें संसार सदा ही जो कृति गुण परिचायक होसदा जुड़ा

विस्तार से पढ़ें »
कविता

जीवन तेरा मुस्कुराता रहेगा

अगर ज्ञान का दीप जलता रहेगाखतम ओ अंधेरे को करता रहेगाअगर ना जलाया तू दिल मे ये दीपकअंधेरा सदा तुझको छलता रहेगासदा ही दिलों मैं

विस्तार से पढ़ें »
कविता

कविता

कविता मात्र कागज पर कलम से लिखी गई कुछ पंक्तियाँ नही हैं। उसका हर शब्द केवल वर्णमाला का योग नहीं है, जो आपस में जोड़

विस्तार से पढ़ें »
गज़ल

वो जिसके वास्ते जनमों जनम ठहरा रहा होगा

वो जिसके वास्ते जनमों जनम ठहरा रहा होगा उसी के आने जाने पे कड़ा पहरा रहा होगा बहारों की ये ख़्वाहिश उसके भी सीने में

विस्तार से पढ़ें »
गज़ल

मान लेंगे वो बुरा तो मुस्कराना छोड़ दें

मान लेंगे वो बुरा तो मुस्कराना छोड़ दें किस सबब उनकी जलन में गीत गाना छोड़ दें अपना तो हर धर्म ईमां हर चलन है

विस्तार से पढ़ें »
Total View
error: Content is protected !!