
आज से बस मेरी हो
वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

वजह रही हो चाहे जो भी मुझसे मिलने कीस्वार्थ में या की प्रेम में ही बात करने कीआंख के रास्ते से दिल में समाए बैठी

जिंदगी के सफर में यूं ही घूमता हूंहवाओं के संग में ही मैं झूमता हूंवादियां जो प्रकृति की प्रफुल्लित खिली हैंउसी में ही जीवन का

आज अंतिम चरण युद्ध का चल रहाराम पर भारी रावण जब पढ़ने लगामारकर राम की सेना को आज तोमद मे खोकरके रावण भी हंसने लगाशक्ति

हे राम प्रिय हमारे लंका में अब पधारोकर के विनाश निशिचर हमको भी जग से तारोंहे राम प्रिय हमारेभटकता फिरू मै कब तक निशचर की

आज अवध के राजभवन का उत्सव भी गमगीन हुआजिसको मिलना राज सिंहासन उसको तो बनवास मिलायुद्ध कला पारंगत कैकेयी राजा का जब प्राण बचायाखुश हुए

आशिक़ी जब दरमियां बढ़ने लगी बिन तेरे तन्हाईयां बढ़ने लगी आस है तेरे मिलन की इसलिए दिन-ब-दिन बेताबियां बढ़ने लगी ज़िक्र तेरा महफिलों में जब

मेरी तनहाई का सहारा हैये नदी का जो इक किनारा है मन करे जब भी लौट आना तुमदिल मेरा आज भी तुम्हारा है मेरी आंखो

कल मैं छोटा सा नन्हां सा अनभिज्ञ शिशु था , कहां थी पहचान ,अपनों और परायों की , जिनसे थोड़ा सा लाड़ प्यार पा लिया

मन पतंग कर्म एक डोरी है, हरदम थाम के रखता हूं। फिर भी देखो उड़ता हीं जाता, थाम ना इसको पाता हूं ।। मन बावरा

कल तक तो चांद चमकता था, जाने क्यों मैला मैला सा हो गया । मधुबन में गुंजन करने वाला, कहां पता किस ओर गया ।।