
खुद अपनी तकदीर बनाएंगे
किस्मत का लिखा मिटाएंगे, खुद अपनी तकदीर बनायेगे । आज जमाना मेरी हंसी उड़ा ले कल सबके मुंह उतर जायेंगे ।। अभी सब दर्द जख्म

किस्मत का लिखा मिटाएंगे, खुद अपनी तकदीर बनायेगे । आज जमाना मेरी हंसी उड़ा ले कल सबके मुंह उतर जायेंगे ।। अभी सब दर्द जख्म

आओ हम अभिनंदन करते उड़ रहे गुलाल का आ रहे नये साल का।। भ्रमर गुनगुनाते, खिलती हैं कलियाँ महँ – महँ महँकते, चौराहे औ गलियां।

क्या कभी आपने उसकी भावना को समझा जब आपके हाथ बढ़ते हैं डाली की तरफ कलियां चुनने के लिए डाली कंपन करती है डरती है

एक तेरे सिवा कोई भी,हमारा नहीं है, हमने ऐसे तो किसी को,पुकारा नहीं है ।। ये इश्क भी तो है एक,दरिया के जैसे, इसमें दिखता

जब पूरब की कोंख सेप्रगट होगा प्रकाश पूंजऔर होगी चितवतखग वृन्दों की गूंज ।तब आँख बरबस खुलेगीसृष्टि का अनुगान करने ।चमन सोया नहीं थाजब तुम

सिंह आदि मांसाहारी को, करना हैं पड़ता , संघर्ष अगर । तो प्राण रक्षा हेतु भागते, मृग आदि शाकाहारी डरकर।। मृग आदि शाकाहारी को ,

होती हैं बहुत कष्टदायी यह सर्द रातें, विशेषत: उनके लिए जो घरों में रहना चाहते । मज़बूरी और भाग्य की ठोकर ना जानें वो बेचारे

मिलती है असफलता एक बार में, तो उससे भी कुछ सीखा होगा उस बार में उस अनुभव को न जानें दो बेकार में क्या कमी

चक्रव्यूह के हर द्वार परमैं अकेला ही खड़ा था,महारथियों कीसमवेत सेना के सम्मुख,तलवारों की नोंक सेअपने को बचाता हुआअंधी सुरंगों के बीचउजास की रेखाएं ढूंढ

हम सब अपने अपने धर्म के तरफदार हैं मगर धर्म है कहाँ मंदिर में देखा तो मूर्तियां मिली घण्टी,घड़ियाल दीप धूप बत्ती मिली मगर धर्म