
26 जनवरी की तैयारी
चलो 26 जनवरी,की करते है तैयारीसीमा पर,निगरानी करते हैकोई दुश्मन मौका,देखकर घुस ना आयेहमारी सीमा मेंऔर मचा दे ना आंतकजब मना रहे हो,देशवासी गणतंत्र दिवसचौकसी

चलो 26 जनवरी,की करते है तैयारीसीमा पर,निगरानी करते हैकोई दुश्मन मौका,देखकर घुस ना आयेहमारी सीमा मेंऔर मचा दे ना आंतकजब मना रहे हो,देशवासी गणतंत्र दिवसचौकसी

हम दीन दुखियन के अब मैये करथिन उद्धार,ओ हंसा रे तू ले आ मैया के हमरे दुआर। न है कौनो पैसा कौड़ी न हीं है

तेरी ख़ातिर चढ़ा देंगे वतन हम भेंट तन मन कीनहीं चिंता करेंगे अपने सुख की अपने जीवन की निपटने के लिए दुश्मन से काफ़ी बाँकपन

देश भक्ति में झूमे सारे, मनाए उत्सव मिलकर।गणतंत्र दिवस हमारा, मुस्काए हम खिलकर। हाथों में तिरंगा लेकर, गीत वतन के गाए।आओ आज मिलकर, महोत्सव हम

रेगिस्तान की भूमि पर सोच रही थीं मैंदूर दूर तक कोई रहने वाला नही था वहाँपर्यटक आते व लौट जाते आखिर.. क्यों..?क्या रेत के टीले

बसंतोत्सव पर प्रकल्प मेरा संकल्प मेरा…अपनी लेखनी से शब्द रूप मै दे पाउँ…नव प्रभात नव संचार मिलेगाखुशियों का उपहार मिलेगाकलम में मेरी धार रहेगीनित नई

लो बसंत आयामेरा प्यारा बसंतपेड़ो में नव चेतन लानेलो आ गया वसंतपेड़ो के रूखे अधरों परहरित क्रांति लेकर आयानव सृजन को ततपर प्रकृतिफूलो को खिलाने

उस दिन हमारे प्रेम में मानो …ओस की ताजा ताजा हल्की भीगीबरसात थी वह बसंत कीरोपा था हमने यहीँ बस यूँ हीवह सरसों का पीला

अनुराग का बाग लगे हिरदयंजिसमें नित झूल रहीं हैं बेटी। नित नूतन कुसुमित पल्लवित होंदुःख दर्द को भूल रहीं हैं बेटी ।। बड़े भाग्य सानिध्य

हरिजन वही है जिसेहरि ने जना हो मित्र ।बातें विचित्र करचित्त ना बिगारिए ।। धर्म की ध्वजा केवाहक सभी हैं यहाँ ।निज हृद स्थल सेसंसय