पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

अपनेन बूते मंगलसूत(अवधी कविता)

आगे बढिगा ढेरि जबाना अंगुरी आजी बाबक् छूट अम्मा बप्पक कहेम चलत हैं कहां बताओ बिटिया पूत अंगरेजी कै यहै पढाई परमपरा का लइगै लूट

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कविता

हम अपनी दौलत लूटा रहे है

कवन, बिधि करू, मुकुन्द हम, तोड़ बड़ाई,कबहुं, प्रेम, कभी करू, लड़ाई,तोड़ प्रीति, सुनु हरजाई,मोरे मन ही मन मे, हेराई।। अब, करहु सनाथ, राम रघुराई।हे, अ

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कविता

मेरी जान को, मेरी जान से दिक्कत है

हम ने दमन, बचाने, की बड़ी, कोशिशें की मुकुन्द,पर, उन्होंने दामन, न छोड़ा, कभी चलते चलते,वो जो, शामिल रहे, मेरे मरने, की ज़िद में,मुकुन्द, ख़ुदा

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कविता

एक पल

मैंने कभी नहीं चाहाकि तुम संपूर्ण जीवन समर्पित करोसिर्फ चंद खुशियों के लिएमैंसिर्फ तुम्हारा एक पल चाहता हूं।उसी पल में जीना चाहता हूंसंपूर्ण जीवनअधरों पर

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कविता

चाहते तो तुम भी हो

चाहते तो तुम भी होकि आपके बायें बैठने वालीआपकी ताकत बनेकमजोरी नहीफिर क्यों करते हो दिखावासबके सामनेमुझे जलील करने कामुझे शर्मिंदा करने कासाथ न देने

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कविता

मां अब मै बडा हो गया हूं

सौन्दर्य भरा जीवनव्यतीत कर रहा एक बच्चाभवन का मालिक समझता खुद कोजब मां लाती है दूध का ग्लासतो फेक देता है बिना सोचे समझेमां के

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