
सुनो ना
सुनों..ना तुमबहुत बातें करती हूँ मैंअक्सर तुमसेन जाने क्योंसामने होने पर बोलनहीं पाती हूँपर अपनी लेखनी सेअपनी कविताओं मेंबात कर लेती हूँअपने मन केसारे भावओर

सुनों..ना तुमबहुत बातें करती हूँ मैंअक्सर तुमसेन जाने क्योंसामने होने पर बोलनहीं पाती हूँपर अपनी लेखनी सेअपनी कविताओं मेंबात कर लेती हूँअपने मन केसारे भावओर

मैं नही किसी से बैर भाव रखती हूँबस देश के काम आ सकूँ यही भाव रखती हूँदेश की मिट्टी माथे से लगाकर फक्र महसूस करती

भोले भंडारी शिव सत्य सन्यासी, सदा रहे ध्यान मगन शम्भू अविनाशी, भूत-प्रेत गण शिव संग चलत हैं, दीन हीन पद स्वारथ कर बनाते विश्वासी,

शिवमय जीवनजीवन का अनमोल क्षण,शव नहीं शिव मय हो।मन से निकले प्यारा बोल,जिसमे सुंदर सा लय हो।मानवता सब में झलके,किसी से न कभी भय हो।विवेक

आया है बसंतमन में लाया है उमंग ।चलो खुशी से नाचे हमदेखो नाच रहें है भुजंग ।। कोयल की आवाजमन में मिठास भर देती है

होली ने रंग बिखेरे हैं आनंद का रंग सब मे होयमेल मिलाप भी रंग है प्रहलाद सभी में होय प्रहलाद सभी में होय, दुश्मन दुश्मनी

होली पर हर रंग प्रहलाद है बुराइयाँ जला दें तो मिलता प्रहलाद सा प्रसाद है साल के अंत में होली का आना बुराइयां जलवाकर रंग

श्री हरी श्री हरीमहादेव भोले भंडारीजो भोले का नाम जपेउसकी सारी विपदा टारीतुझसे राम तुझसे ही नारायणग्रंथ पवित्र करें हमेंतेरी कृपा बरसे त्रिपुरारीसारा जग तेरे

ये आजादी नहीं हमने,कोई उपहार पाई है।हमारे राष्ट्र भक्तो ने,लड़ी कितनी लड़ाई है।।न जाने लाल कितने,इस जगत जननी ने हैं खोए।तभी जाके सभी अवनी में,हम

जानकी से बोले महावीर हो अधीर मातु,प्रश्न एक आप बड़ा मन में जगाती हो।करती नही हो समाधान न विधान स्वयं,करती जो प्रभु हेतु मुझे सिखलाती