
फिर याद आई गांव की खुशबू
फिर याद आई गांव की खुशबूमन करता मैं लौट जाऊंतनाव भरी जिंदगी सेहमेशा के लिए मुक्ति पाऊं। भागदौड़ की जिंदगी है शहरों मेंविकास का तनाव

फिर याद आई गांव की खुशबूमन करता मैं लौट जाऊंतनाव भरी जिंदगी सेहमेशा के लिए मुक्ति पाऊं। भागदौड़ की जिंदगी है शहरों मेंविकास का तनाव

अब भी पगडंडी राहों पर, चलता पागल पांव हमारा।बिते दिन की यादों को ले, खड़ा यह पीपल छांव पसारा।सन-सन करती चलती पूर्वा,संदेशा किसकी लाती है,बरसों

मेरे गुरु, भोले भंडारी, उनके गुरु गोसाई।बज्रिका मेरी वैशाली वाली, मिथिला वाली, सीतआमाईअब सुनो जोगीरा, भाई।जोगीरा स र र र र जोगीजी, जोगीजी वाह जोगीजी,राधा,

हो उद्धार शहर का मेरे आप बनाए सवेरे अब तो कुछ प्रण करो शहर को मेरे स्वर्ग करो नालियों में है कूड़ा करकट मच्छर भी

कुछ जानबूझ के कुछ अनजाने में किया करते हैं हम उनको कैसे कह दे अकेले ही जिया करते हैं फितरत है दुनिया की हर रोज

जाना मेरा तय है अपना ना बनाओ ओ दिलरुबा इसे ठिकाना ना बनाओ गुजर जाएगा वक्त बहाना ना बनाओ दिल है साफ- साफ दीवाना ना

खुशी-खुशी बीत जाए जिंदगी का सफर कौन यहां रहने आया जग में जो आया वही भरमाया कौन यहां रहने आया कल्पना क्या करें सभी सरताज

स्वागत है वंदन तेरा तू बना ले चंदन मेरा दमका करूंगा मैं भी तू अपना ले अभिनंदन मेरा गंगा को मिला संग तेरा

बेकरारी दिलों की छुपाने लगे आग हाथों से अपने लगाने लगे छा गया दिल में उसका नशा इस कदर ख्वाब का एक महल अब बनाने

कभी जब मन करे तेरा मेरे दर पर चले आना बिछाए पलके बैठे है उसी में तुम समा जाना करूंगा दिल की ही बातें सुकू