पद्य-रचनाएँ

Category: पद्य-रचनाएँ

कविता

पर्व है रंगों का

पर्व है रंगों का मन को भी रंग लीजियेहोलिका भस्म हुई प्रहलाद को संग लीजिएभक्ति की शक्ति को सदा नमन रंग दीजिएनास्तिकता बदरंग है इसका

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कविता

लेखक और उसकी लेखनी

लेखक और उसकी लेखनीस्वतंत्र हो आजाद हो तो है घनी मुग़ल आये तो हिन्दुओं ने कमियां ज्यादा देखि या खूlबीयांसोचती तो होंगीलेखक और उसकी लेखनी

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कविता

फागुन में मन बौराया

फागुन में मन बौरायामनवा बहुत ललचायावातावरण बना सुखमय सौंदर्य काखुशबू फूलों को भाया । फागुन के रंग में हम भी ढलेंराधा कृष्ण के संग चलेंखूब

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कविता

परछाईं

वे जब भी रोशनी में आते हैं,उन्हें मुँह चिढ़ाती है उनकी परछाईं |कभी छोटी, कभी बड़ी,कभी प्रश्नवाचक,कभी विस्मयादि मुद्राओं में आकार लेतीउन्हीं के अस्तित्व का

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कविता

मैं मंत्रों की हृदय धारा हूँ

चाहो तो जड़ देना ताले दुनियां भर की किताबों पर लेकिन नहीं बना सकते तुम ऐसी कोई दीवार जो पहरे बैठा दे मुझ पर मैं

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