
चलता पागल पांव हमारा
अब भी पगडंडी राहों पर, चलता पागल पांव हमारा।बिते दिन की यादों को ले, खड़ा यह पीपल छांव पसारा।सन-सन करती चलती पूर्वा,संदेशा किसकी लाती है,बरसों

अब भी पगडंडी राहों पर, चलता पागल पांव हमारा।बिते दिन की यादों को ले, खड़ा यह पीपल छांव पसारा।सन-सन करती चलती पूर्वा,संदेशा किसकी लाती है,बरसों

मेरे गुरु, भोले भंडारी, उनके गुरु गोसाई।बज्रिका मेरी वैशाली वाली, मिथिला वाली, सीतआमाईअब सुनो जोगीरा, भाई।जोगीरा स र र र र जोगीजी, जोगीजी वाह जोगीजी,राधा,

हो उद्धार शहर का मेरे आप बनाए सवेरे अब तो कुछ प्रण करो शहर को मेरे स्वर्ग करो नालियों में है कूड़ा करकट मच्छर भी

स्वागत है वंदन तेरा तू बना ले चंदन मेरा दमका करूंगा मैं भी तू अपना ले अभिनंदन मेरा गंगा को मिला संग तेरा

बेकरारी दिलों की छुपाने लगे आग हाथों से अपने लगाने लगे छा गया दिल में उसका नशा इस कदर ख्वाब का एक महल अब बनाने

कभी जब मन करे तेरा मेरे दर पर चले आना बिछाए पलके बैठे है उसी में तुम समा जाना करूंगा दिल की ही बातें सुकू

पार जाके सात सेतू रहनुमा जो बन गए छोड़ अपनापन पराए गुलिस्ता के हो गए याद में उनकी सदा ही मा तड़पती रह गई लौट

शीश जटा और चंद्र विराजे गले भुजंग लपेटे हुए हैं माथे पे हैं जो त्रिनेत्र विशाल उसी से सभी को निहार रहे है कान में

बाबा बेलखरनाथ का है मंदिर यहां दिव्य बना आओ सब भक्त मिल पूजा यहां कर ले दक्षिण में कुछ दूरी बहती सई नदी है कर

रूह में मिलने का इरादा बहुत ज्यादा था खुद को योग्य समझूं ये नासमझी बहुत ज्यादा था । मिले थे जिस कदर जिन यादों ने