आँखों का होता इशारा गर कभी मेरी तरफ
चांद तारों का बदलता रूख सदा मेरी तरफ
लड़खड़ा गिरता कभी ना जिंदगी के मोड़ पर
तेरी बाहों का सहारा होता गर मेरी तरफ
मैं चमन के फूल जैसा रोज खिलता डाल पर
देखती नजरें तेरी गर प्यार से मेरी तरफ
मुरझराता ना वगीचा जिंदगी का फिर कभी
प्यार का ये जल कभी आता अगर मेरी तरफ
मैं अंधेरे में न रहता इस जमाने में कभी
रोशनी गर चांद की होती कभी मेरी तरफ
बन के बालों का मैं गजरा गर महकता रात दिन
बैठकर गुमसुम सा क्यों मैं घूरता उसकी तरफ
मय भरी आंखें छलकती गर मुझे मिल जाती तो
जाम पीने को सदा क्यों जाता मैं उसकी तरफ
बुरा मुझको साबित करता है जमाना आज भी
सब ही उसके साथ हैं कोई नहीं मेरी तरफ
इस जमाने की न नजरें अब उठे मेरी तरफ
देख कर के सच को गर तू बोल दे मेरी तरफ
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


