आओ आज जिंदगी की भूल हम सुधार ले
जो भरा है द्वेष मन में आज हम निकाल दे
सब की मुस्कुराहटों पे आज दिल निसार दे
कलियां जो खिली है दिल मे उसको अब सवार दे
कमियां जो मेरी है उसको आज हम निकाल दे
नेक काम करके अपना जीवन अब सुधार ले
कष्ट जो उठाए तूने उसको भी बिसार दे
नेक राह पर ही चलके जिंदगी सवार दे
प्यार दे के जिंदगी को प्यार से सवार दे
संघर्ष भरी जिंदगी है कर्म की तू धार दे
दूर होगी बाधा तेरी दूर होगे कष्ट सब
मन लगाकर जब पढ़ोगे कर्म की किताब को
जो बची है जिंदगी वो हंसके अब गुजार दो
क्या पता कि कौन सा पल जिंदगी की शाम हो
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


