कहते कहते न जाने कि किस भाव में
डूब कर मेरी अखियां बरसने लगी
धीरे-धीरे चढ़ी थी नजर में ही वो
इक बयक आज दिल से उतरने लगी
पहले दिन जब वो मुझको मिली थी यहां
उड़ान आसमा तक वो भरने लगी
ले लिया मुझकोअपनी वो आगोश में
मौन हो ओठ कंपन सी करने लगी
रात की शम्मा जलती रही रात भर
गम भरा दिल अंधेरा ही करने लगी
कोई समझा नहीं इसके रंग रूप को
रोज ही रंग अपना बदलने लगी
आज क्या हो गया कुछ पता ना चला
अपनी बातों से ही वो मुकरने लगी
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


