जब हम का नशा दिल में छा जाएगा
सारा जीवन अधेरा सा हो जाएगा
चाहे कितनी उसे रोशनी दो भले
दिल में फिर भी उजाला न कर पाएगा
जब उजाला अंधेरों से घिर जाएगा
ये अंधेरा उजालों सा दिख जाएगा
जब अहम प्रेम ढक्कन को ढक लेगा तब
एक कांटा सा दिल में ही चुभ जाएगा
देगा कुछ भी नहीं तुझको तेरा अहम
अपनों को भी पराया बना जाएगा
ए जीवन तो खिलता हुआ फूल है
डूबकर भाव में इसको महकाइए
ये अहम एक तपता हुआ रेत है
देके गर्मी न इसको तू झुलसाइए
मैं ही सब कुछ हूं भ्रम दिल जो पल जाएगा
प्रेम का फूल इसमें ना उग पाएगा
भाव पावन न दिल का हुआ गर तेरा
भाग्य जीवन का तेरे बिखर जाएगा
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


