अब न रहना मुझे कैद होकर
अब परिंदों की जैसे उडू मै
ना सिमट जाऊं मैं पिजड़े में ही
उड़ान अब आसमां तक भरू मै
चीज जितनी निराली जगत में
उसका रसपान हरदम करूं मैं
जो बिखेरे हैं खुशबू पवन ने
ऐसी वादी में ही सांस लूं मैं
जो बिखेरे जगत भर में खुशियां
प्रेम ऐसे प्रदर्शित करूं मैं
फैले खुशियां ही खुशियां जगत में
ऐसी हरदम कली सी खिलू मै
हो मनोरम सी पावन ये धरती
चांदनी बनकर शीतल करूं मैं
प्रेम की ही फसल लहलहाए
अंकुरित बीज ऐसे बनू मै
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


