दर्द होता है और दिल ये मचल जाता है
जब भी दिल को मेरे तेरा ख्याल आता है
उलझने छाती मन में आंख ये तारे गिनते
जबसे आंखों के जाल में कोई फस जाता है
होती हसरत कि दीदार उनका हो जाए
खुली पलकों में कई सपने सजा जाता है
सदा ही रिश्तो को जो अपने निभाते रहते
उन्हीं से रिश्तो का इतिहास लिखा जाता है
जिसने हारा है खुशी के लिए अपना जीवन
उनका जीवन सदा खुशहाल बना जाता है
दूरियां दिल की तब तो सारी ही मिट जाती है
नफरतों की घटाएं जब भी घटा जाता है
फिर तो कुछ याद नहीं कितने गम मिले है मुझे
प्रेम में डूब गीत गुनगुना ओ जाता है
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


