चिंता मत कर असफलता की मत पछताओ जीवन में
जीवित रहना व्यर्थ है गर संघर्ष न हो इस जीवन में
जीवन है दो दिन का मेला हस लो गा लो जीवन तेरा
चिंता में डूबे हंसे नहीं तो जीवन है बेकार ये तेरा
देख रात दुख की ये बदली करो न तुम इस मन को भारी
सदा रहा ना दुख जीवन में सुख दुख आते बारी-बारी
बड़े-बड़े भी इस जीवन में ऐसे वैसे बन जाते हैं
बिल्डिंग में भी रहने वाले मिट्टी में मिल जाते हैं
मानव की सोच हमेशा उसको उस पथ पर ले जाएगा
जैसी होगी सोच हमारी सुख-दुख वैसा पाएगा
संघर्ष हमेशा करते चलिए यह अवसर फिर ना आएगा
कुछ दिन कष्ट उठा ले बंधु फिर यह वक्त गुजर जाएगा
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


