मां की गोद

मां की गोद है सबसे प्यारी,

इसकी तो है बात निराली ।

इसका अंचल कवज के जैसे,

दुआ से मिटती विपदा सारी ।।

माता यशोदा के घर पर,

शिशु बन कर आए अवतारी ।

इस जग को नाच नाचने वाले,

खुद ओखल में बंधे गिरधारी ।।

माता पिता को कांवर में बिठा कर,

दर्शन तीर्थों के, करता आज्ञाकारी ।

मात पिता को,जब प्यास लगी,

जल लेन गया था,वो हितकारी ।

आखेट के धोखे, बाण लगा और,

तो यूं बोला, श्रवण परोपकारी ।

मेरे मात पिता, प्यासे है वन में,

कुछ करो दया, हे धनुधारी ।।

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रचनाकार

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  • अनूप अंबर

    नाम : अनूप अंबर जन्म तिथि:01जनवरी 1991 पिता का नाम:राजेश कुमार पता: फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेशइनके नौ साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं, पच्चीस अर्थलोगी प्रकाशित हो चुकी है, विभिन्न मंचों से 150 से अधिक सम्मान पत्र प्राप्त है, इनकी विभिन्न रचनाएं पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है,ये कई साहित्य पटलों पर सक्रिय है ।। Copyright@अनूप अंबर / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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