बगियम् नवा बसंत(अवधी कविता)

दुलहिन अस धरती सजी

भवा सीत कै अंत

लयि पुरुवाई आयि गै

बगियम् नवा बसंत

बगियम् नवा बसंत

लिखैं प्रिये प्रियेतम का पाती

अउ महुआ के महकावन से

अमराई माती गुडहल गेंदवा अउर चमेली

महक उडेलैं

प्रेम दिनन मा प्यारे

बइठ बिछोहा झेलैं

बसी शारदा मैय्या मानौ

फिर से करिया कंठ

अउ लयि पुरुवाई आयि गै

बगियम् नवा बसंत ,

कली कली चटकीं अस

मानौ

अब तब फुलिहैं

के जानै कब झुलनी

गोरिक् कान मा झुलिहैं

लाल पियर हरियर कुलिहौं

अस रंग रंगीला

बहुतै रहा उज्जड

परा भंवरा सरमीला

नदी किनारे बिचरत ,अवधी

जोडै जोड़ा हंस

लयि पुरुवाई आयि गै

बगियम् नवा बसंत ,,

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रचनाकार

Author

  • संजय श्रीवास्तव अवधी

    प्रसिद्ध नाम-संजय अवधी, पिता-दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव, लेखन विधा- गीत और कविता, प्रथम काव्य प्रस्तुति- ऑल इंडिया रेडियो, गीतकार के रूप में उपलब्धि- विश्व स्तरीय म्यूजिक कंपनी टी सीरीज के लिए गीत लेखन, प्रारंभिक लेखन- श्री महेश्वरी सेवक मासिक पत्रिका, प्रतिष्ठित समाचार-पत्रदैनिक जागरण से. विशेष उपलब्धि- रजत जयंती सम्मान अवध भारती सम्मान तथा अवधी तुलसी सम्मान 2021 अवध भारती संस्थान द्वारा प्राप्त एवं अन्य संस्थानों द्वारा सम्मानित. आने वाली प्रथम अवधी पुस्तक- 'भोली चिरैया' उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा. संस्थापक- अवध सीरीज अवधी लोककला विस्तार मंच लल्लू पुरवा,इटरौर. निर्माता निर्देशक- अवध सीरीज. उद्देश्य- विलुप्त होती अवधी संस्कृति, अवधी लोककला विरासत को ग्रामीण आयोजन के माध्यम से आगे बढ़ाना. पता-लल्लू पुरवा, इटरौर, मनकापुर, गोंडा,Copyright@संजय श्रीवास्तव अवधी/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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