फिर भी मुझे इकरार है

होश में रहियेगा दुनिया लूटने को हमेशा से तैयार है

वो जिसे अपना समझते हो उसके लिए तो व्यापार है

एक दौलत है जिंदगी गर समझो तो अपनी लगे

परायों का भी जिंदगी पर हमेशा से अधिकार है

वो हैं उनकी इनायते करम कहें या रब की

दोनों में बस रही धड़कनों की ही तकरार है

खुदा और भगवन तुझे देख रहे हैं करीब से

तेरे खजाने में भी बंटा हुआ रहा ये प्यार है

वो जो रोके रहा हर शोर ए दिल मेरा

उसमें बसा बस तेरा प्यार ही बेशुमार है

चल छोड़ हाले दिल सुनाना जुर्म ही है लगा

तेरा अलग है वास्ता फिर भी मुझे इकरार है

Facebook
WhatsApp
Twitter
LinkedIn
Pinterest

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

रचनाकार

Author

  • विष्णु "सरहदे"

    पता :शॉप नंबर 6 "A" मार्किट,सेक्टर 4, भिलाई, पिन -490001. दुर्ग, छत्तीसगढ़, फ़ोन-7828112047. Copyright@विष्णु "सरहदे"/इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

Total View
error: Content is protected !!