प्रेम नदी रस की भरी(11 दोहें)

प्रेम नदी रस की भरी , सूखे दोनों तीर ।

तुम भी वहां अधीर हो , मैं भी यहां अधीर ।

प्रेम सदा ही नूतन है , प्रेमी सदा नवीन ।

ये सच उसको भासता , जो रहता तल्लीन ।

हम हैं मीठे आदमी , मीठी अपनी बात ।

यही हमारा धर्म है , यही हमारी जात ।

तन अरुणाचल है तिरा , आंखें चिलका झील ।

मन है फूल गुलाब का , कनक लता सा शील ।

मन को भातीं रश्मियां , तन को छुए नसीम ।

भोर आज बरसा रही , हम पर प्यार असीम ।

गुस्सा बैठा नाक पर , औ बर्ताव अजीब ।

खुला हुआ तन आपका , ये कैसी तहज़ीब ।

हम नजदीकी चाहते , वो करते तकसीम ।

हम हैं रोगी प्रेम के , दुनिया नीम हकीम ।

तन जर्जर मन बाबरा , उस पर तिरा वियोग ।

एक हमारी जान को , दुनिया भर के रोग ।

ये मज़हब है कौन सा , जो करता तकसीम ।

नफ़रत के सब पाठ हैं , ये कैसी तालीम ।

पूरे मन से कीजिए , रिश्तों की तामीर ।

आप भले हों राजकुंवर , या हों कोइ फ़कीर ।

भले महकता बीच में , उर्दू का लोबान ।

मगर दोस्तो सच यही , हिन्दी मिरी ज़ुबान ।

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रचनाकार

Author

  • कमलेश श्रीवास्तव

    कमलेश श्रीवास्तव पिता-श्री शिवचरण श्रीवास्तव माता-श्रीमती गीता देवी श्रीवास्तव जन्म तिथि- 14 अगस्त 1960,श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्म स्थान- सिरोज, जिला विदिशा, म.प्र. शिक्षा-एम.एससी.(रसायन शास्त्र) साहित्यिक गतिविधियाँ- आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हिन्दी उर्दू काव्य मंचों पर काव्य-पाठ| कृतियाँ/प्रकाशन- नवगीत संग्रह समांतर-3, गज़ल संग्रह "वक्त के सैलाब में" एवं गज़ल संग्रह "क्या मुश्किल है" का प्रकाशन सम्प्रति- शाखा प्रबंधक एम.पी. वेअर हाऊसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन शाखा पचौरी, जिला-रायगढ़ में शाखा प्रबंधक के रूप में पदस्थापित| संपर्क सूत्र- 269"धवल निधि" बालाजी नगर,पचौर, जिला- रायगढ़, म. प्र.,पचौर 465683 मो-09425084542 email-kamlesh14860@gmail.comCopyright@कमलेश श्रीवास्तव / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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