आज अपने दिलों को मिला लीजिए
फिर ये धड़कन दिलों की मिले ना मिले
क्या पता कौन जाने कहां खो गया
जिंदगी में दोबारा मिले ना मिले
नफरतों से भरे रास्ते हैं बहुत
कब पनप जाए दिल द्वेष की भावना
थोड़ी बारिश पे मौसम बदल जाता है
फिर ये मौसम दोबारा मिले ना मिले
प्रेम सागर से गहरा है नभ से बड़ा
प्रेम की भावना दिल बसा लीजिए
दिल भरे प्रेम में आज तुम डूब लो
प्रेम का फिर ये सागर मिले ना मिले
क्यों तू धन के अंधेरे में खोया हुआ
साथ में तेरे कुछ भी नहीं जाएगा
जाने किस रूप में फिर मिलेगा जनम
घर वतन ये तुम्हारा मिले ना मिले
आज सोचो विचारों जरा गौर से
नफरतों के शहर में तू क्यों खो गया
प्रेम की फैली चादर को तुम ओढ लो
फिर तो सुख की ये चादर मिले ना मिले
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


