मुझे अपने दिलों में तुम बसा लेते तो अच्छा था
मेरा बिखरा हुआ जीवन सजा देते तो अच्छा था
सदा ही दिल में रहता मैं तुम्हारी धड़कने बन कर
दिलों से दिल की धड़कन को मिला लेते तो अच्छा था
कमी ना कुछ कभी रहती अगर तुम पास में होते
दिलों में छाया सूनापन भगा देते तो अच्छा था
तेरे हर एक लफ्जों में मधुर संगीत जो फूटे
छेड़कर राग नगमे को सुना देते तो अच्छा था
उलझ कर व्यर्थ की बातों मैं दिल को तोड़ते क्यों हो
दिलो से दिल का समझौता करा देते तो अच्छा था
मेरे दिल को सदा ही दिल से अपने जोड़ कर रख लो
कभी ना टूटे जो रिश्ता निभा लेते तो अच्छा था
मैं सारा ही जमाना छोड़ देता प्यार में तेरे
भुलाकर रंजो गम अपना बना लेते तो अच्छा था
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


