नारियों का योगदान

इतिहास ने दिया है , गवाही समाज हित , नारियों के द्वारा दिए , पुण्य योगदान की ।

एकता के सूत्र में जो , बांधी परिवार को तो , तोड़ नहीं पाई शक्ति , शक्तिमान की ।।

पोरुष्ता के नाम पे , लक्ष्मी दुर्गा झलकारी , मोहताज नहीं आज , कोई पहचान की ।।

नारियों ने संवारा है , भार सारे संसार का शिखर हैं समाज की , नीव खानदान की ।।
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बेटी तुझे ब्तलाऊं , राज आज सासरे में , खुशियों से भरपूर , सुख के संसार का ।

चाह की बनेगी राह , होगी तेरी वाह – वाह , सबकी निगाह में तू रूप होगी प्यार का ।।

देना है पहले तुझे , मान सम्मान बाद में , ख्याल आए निजता के , कोई अधिकार का ।।

कारण बनना नहीं , बूढ़े सास ससुर के , घर को त्याग आश्रम , जाने के आधार का ।।

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रचनाकार

Author

  • देवेन्द्र डहेरिया देशज

    मुकाम पिपरिया कला, तहसील केवलारी, जिला सिवनी, मध्यप्रदेश, पिन 480991. Copyright@देवेन्द्र डहेरिया देशज/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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