नमन उनको मैं करता हूं

दिलाई जिसने आजादी नमन उनको मैं करता हूं
गवाएं प्राण थे जिसने नमन उनको मैं करता हूं
नहीं देखा नहीं सोचा कि आगे हाल क्या होगा
समर में कूदा जो उसका यहां अंजाम क्या होगा
बटूगा टुकड़ों में कितने या टुकड़े कितने कर दूंगा
भले परिणाम कुछ भी हो तिरंगा साथ ही होगा
भरा था जोस दिल में और चेहरे पर रवानी थी
उन्हें जड़ से उखाडूगा लिखी ऐसी कहानी थी
नहीं था डर कोई उनमें न मन में कोई थी चिंता
वतन पर ही मरूंगा ऐसी उनकी ये जवानी थी
बाजुओ में थी वो ताकत वो उमड़ता जोश था
सुख औ दुख उनका ही सारा देश पर कुर्बान था
भगाएंगे फिरंगी को कसम जिसने यह थी खाई
गवा कर प्राण अपने भी दिलाई हमको आजादी
कई बीते बरस पर याद उनकी आज ताजा है
भरे नैनो के जल से नमन करने का इरादा है
नयन जल अश्रुपूरित से नमन उनको मैं करता हूं
दिलाई जिसने आजादी नमन सबको मैं करता हूं

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रचनाकार

Author

  • गिरिराज पांडे

    गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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