धरती महरानी (अवधी कविता)

सावन मा धरती महरानी

सजि धजि छम छम बाजत हीं

राति गगन जब उवै अंजोरिया

दुलहिन जयिसै लागत हीं

कुलि वरि घनी हरियरी छायी

नदिया घरुही तक चढि आयी

नाचै ठुमुक ठुमुक खुब मोरवा

लहरा लयि आवै पुरुवाई

ललगुझवा खुब मीठ चिरइया

निधरक भयि खुब चाभत ही

राति गगन जब…………

फुलवन से महकै फुलुवारी

घर अंगना का बगिया बारी

कोहड़ा लउंकी सेम तरोई

ताकि रहे बिरवा तरकारी

जेठ पियासी गांवक् तलइया

आज मेढउरी नाघत ही

राति गगन जब………….

मेघा टर्रैं झींगुर गावैं

जुगनू जग जग रंग जमावै

बिसधर बीछी गोजर मिलिकै

रोजै सबकै जिव डेरुवावैं

अवधी कै खुब मगन कलमिया

गजब निसाना साधत ही

राति गगन जब उवै अंजोरिया

दुलहिन जयिसै लागत हीं !!

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रचनाकार

Author

  • संजय श्रीवास्तव अवधी

    प्रसिद्ध नाम-संजय अवधी, पिता-दिनेश चन्द्र श्रीवास्तव, लेखन विधा- गीत और कविता, प्रथम काव्य प्रस्तुति- ऑल इंडिया रेडियो, गीतकार के रूप में उपलब्धि- विश्व स्तरीय म्यूजिक कंपनी टी सीरीज के लिए गीत लेखन, प्रारंभिक लेखन- श्री महेश्वरी सेवक मासिक पत्रिका, प्रतिष्ठित समाचार-पत्रदैनिक जागरण से. विशेष उपलब्धि- रजत जयंती सम्मान अवध भारती सम्मान तथा अवधी तुलसी सम्मान 2021 अवध भारती संस्थान द्वारा प्राप्त एवं अन्य संस्थानों द्वारा सम्मानित. आने वाली प्रथम अवधी पुस्तक- 'भोली चिरैया' उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा. संस्थापक- अवध सीरीज अवधी लोककला विस्तार मंच लल्लू पुरवा,इटरौर. निर्माता निर्देशक- अवध सीरीज. उद्देश्य- विलुप्त होती अवधी संस्कृति, अवधी लोककला विरासत को ग्रामीण आयोजन के माध्यम से आगे बढ़ाना. पता-लल्लू पुरवा, इटरौर, मनकापुर, गोंडा,Copyright@संजय श्रीवास्तव अवधी/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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