दोहें-हम बैरागी हो गए

हम बैरागी हो गए , मत अब डोरे डाल ।

खारा पानी मन हुआ , नहीं गलेगी दाल ।

मुखड़ा उस मासूम का , जैसे खिला गुलाब ।

लहज़ा उसका रेशमी , बजता हुआ रबाब ।

रजनीगंधा सी हँसी , मुखड़ा है रजनीश ।

बदन लरज़ती शाख़ है , कुदरत का आशीष ।

बहुत उठाए आपने , इन बच्चों के नाज़ ।

अब सुनिएगा उम्र भर , ये ऊंची आवाज़ ।

रखो जला कर राह में , तुम यादों के दीप ।

शायद कोई लौट कर , आए पुनः समीप ।

आभा तेरी चंपई , औ नीलम परिधान ।

जैसे चांद उतारता , बादल बीच थकान ।

ब्रह्मा का पुष्कर हुआ , ख़्वाजा का अजमेर ।

गेंदा और गुलाब के , संग मुस्काय कनेर ।

झरनों की है पचमढ़ी , झीलों का भोपाल ।

मध्य प्रांत में उड़ रहा , कुदरत का रूमाल ।

शिव नगरी उज्जैन में , महाकाल का लोक ।

चमक रहा हर शीश पर , क्षिप्रा का आलोक ।

तुम हो कोई योद्धा , कहे तुम्हारा ओज ।

हम शैदाई प्रेम के , हम हैं खिले सरोज ।

आंखों में सद्भाव हो , मन में रहे उजास ।

तभी समझना दोस्तो , दौलत अपने पास ।

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रचनाकार

Author

  • कमलेश श्रीवास्तव

    कमलेश श्रीवास्तव पिता-श्री शिवचरण श्रीवास्तव माता-श्रीमती गीता देवी श्रीवास्तव जन्म तिथि- 14 अगस्त 1960,श्री कृष्ण जन्माष्टमी जन्म स्थान- सिरोज, जिला विदिशा, म.प्र. शिक्षा-एम.एससी.(रसायन शास्त्र) साहित्यिक गतिविधियाँ- आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण विभिन्न पत्र एवं पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हिन्दी उर्दू काव्य मंचों पर काव्य-पाठ| कृतियाँ/प्रकाशन- नवगीत संग्रह समांतर-3, गज़ल संग्रह "वक्त के सैलाब में" एवं गज़ल संग्रह "क्या मुश्किल है" का प्रकाशन सम्प्रति- शाखा प्रबंधक एम.पी. वेअर हाऊसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन शाखा पचौरी, जिला-रायगढ़ में शाखा प्रबंधक के रूप में पदस्थापित| संपर्क सूत्र- 269"धवल निधि" बालाजी नगर,पचौर, जिला- रायगढ़, म. प्र.,पचौर 465683 मो-09425084542 email-kamlesh14860@gmail.comCopyright@कमलेश श्रीवास्तव / इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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