तुम्हें क्या लिखूं

तुम्हें क्या लिखूं

मनमोहनी हो तुम,

मन के भीतर रहने वाले

क्या मैं तुमको मनमीत लिखूं…

फूलों सी मुस्कराती हो

दिल को तुम बहलाती हो।

ग़र इज़ाजत हो तुम्हारी

क्या मैं तुमको दिलजीत लिखूं।

मन के भीतर रहने वाले….

ग़म से मेरा नाता टूटा

मुश्किलों से जैसे साथ हो छूटा।

तुम हो तो खुशियां हैं मेरी

क्या मैं तुमको प्रिये अज़ीज़ लिखूं…

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रचनाकार

Author

  • रंजीत गुप्ता "राही"

    रंजीत गुप्ता "राही" कवि, शायर,ज्ञानार्थी, शिक्षक। प्रतापगढ़,उत्तर प्रदेश। फोन-9170493847 Copyright@रंजीत गुप्ता "राही"/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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