डूबता ओ नहीं भाव से जो मरा
डूबने के लिए जिंदगी चाहिए
भीगे दुख में कभी भी ना आंखें तेरी
भीगी आंखें सदा भाव में चाहिए
बीते उपकार में सबका जीवन यहां
भाव दिल में ही सबके भरा चाहिए
सबके जीवन में सुख दुख तो आता ही है
मन भरी यह निराशा नहीं चाहिए
तेरी नइया भंवर में न डूबे कभी
बनना पतवार ऐसा कुशल चाहिए
फूल ही फूल खिल जाए उपवन में ही
जो चुभे ऐसे कांटे नहीं चाहिए
तन से काले भले हो पर मन से नहीं
मन उजाले हमेशा भरे चाहिए
तन से तन की यह दूरी बनी हो भले
मन से मन का हमेशा मिलन चाहिए
प्रेम सबके दिलों में ही उपजे सदा
नफरतों की घटाएं घटी चाहिए
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


