प्रेम द्र्वित ना हो जब दिल में
मुखड़ा क्या देखे दर्पण में
सुख देखे दूजे का कैसे
भरी हुई ईर्ष्या जो मन में
राज दिलों में छुपा के रखता
भरी हुई जो खोट है मन में
जग ये सुंदर लगे भी कैसे
इच्छा के जो मोड़ है मन में
दान करेगा कैसे उनको
लालच ही जब भरी हो मन में
आनंद कहां से मिलेगा उनको
अध्यात्म ग्यान जो नही है मन में
तब कौन किसी का होता है
जब स्वार्थ भरा ही हो जीवन में
अपनत्व की आभा छाए कैसे
जब खंजर चुभा हुआ हो दिल में
रचनाकार
Author

गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |


