चुपके चुपके

तन का मिलना मन का मिलना दिल का मिलना चुपके चुपके
मिलकर दूरी बनी अगर दिल घायल करता चुपके चुपके
शुरुआत प्रेम का जीवन में होता है वह भी चुपके चुपके
प्यार भरे इस जीवन का रस मिलता है पर चुपके चुपके
मन करता भी है डरता भी है नजर ना आऊ चुपके-चुपके
खबर हमेशा हो जाती है फिर भी सबको चुपके चुपके
बात करें जब भी कोई भी वह भी हरदम चुपके चुपके
आंखों से उनसे बाते करना नैन मिलाना चुपके-चुपके
याद बहुत आता पारक में उसका मिलना चुपके चुपके
मीठी मीठी बातें उससे करना हरदम चुपके चुपके
देख ना ले कोई हमको यहां पर छिपना हरदम चुपके-चुपके
छिपकर हरदम दिल में उसका प्यार जताना चुपके चुपके
हाथ पकड़कर दूर ले जाना स्थान ढूंढना चुपके चुपके
घंटो घंटो बातें करना हरदम उससे चुपके-चुपके
साथ निभाने की कसमें खाना तारे गगन से तोड़के लाना
जीने मरने की कसमें खाना फिर भी हरदम चुपके-चुपके

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रचनाकार

Author

  • गिरिराज पांडे

    गिरिराज पांडे पुत्र श्री केशव दत्त पांडे एवं स्वर्गीय श्रीमती निर्मला पांडे ग्राम वीर मऊ पोस्ट पाइक नगर जिला प्रतापगढ़ जन्म तिथि 31 मई 1977 योग्यता परास्नातक हिंदी साहित्य एमडीपीजी कॉलेज प्रतापगढ़ प्राथमिक शिक्षा गांव के ही कालूराम इंटर कॉलेज शीतला गंज से ग्रहण की परास्नातक करने के बाद गांव में ही पिता जी की सेवा करते हुए पत्नी अनुपमा पुत्री सौम्या पुत्र सास्वत के साथ सुख पूर्वक जीवन यापन करते हुए व्यवसाय कर रहे हैं Copyright@गिरिराज पांडे/ इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है | इनकी रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है |

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