चिड़िया

क्या चाहती है चिड़िया ?

चोंच भर दाना/आज़ाद उड़ानें

हरी -भरी डाल पर

तिनकों का छोटा-सा आशियाना

चाहती है चिड़िया

सघन कुंज/ फूले-फले वाटिका-बाग

बालियों भरे खेत/ पथार भरे दरवाजे

किलकता आंगन

चिड़िया फूलों से खेलती है

बयार से बतियाती है

पहुँचाती है आकाश को

धरती का संदेश

धूल में नहाती हुई

पावस को चिढ़ाती है

मुँह अंधेरे/सूरज का स्वागत-गीत गाती है

कोई भी मौसम

चिड़िया के लिए

उड़ने और गाने का मौसम है

लगभग नहीं सुना गया कभी

चिड़िया को रोते

रोती भी होगी /शायद गायन के शिल्प में !

नहीं होती चिड़िया

क्षीण पड़ जाता

धरती का संगीत

पेड़ हो जाते बे-जुबान

सूरज उदास हो जाता

अधिक खाली पड़ जाता आसमान

मीठे फल वाले वृक्षों में

फलने का कम हो जाता उत्साह

दिखाई पड़ता है जब भी

कोई पिंजरा , कोई जाल

तब चहकती नहीं/ चीख़ती है चिड़िया

चिड़िया के साथ जैसे

चीख़ने लगता है

धरती का संगीत !

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रचनाकार

Author

  • डॉ रवीन्द्र उपाध्याय

    प्राचार्य (से.नि.),हिन्दी विभाग,बी.आर.ए.बिहार विश्वविद्यालय,मुजफ्फरपुर copyright@डॉ रवीन्द्र उपाध्याय इनकी रचनाओं की ज्ञानविविधा पर संकलन की अनुमति है| इन रचनाओं के अन्यत्र उपयोग से पूर्व इनकी अनुमति आवश्यक है|

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