केतु के हाथ में साल 2023 में सफलता की चाबी

केतु के हाथ में साल 2023 में सफलता की चाबी
  • विश्व को प्रेरणा प्रदान करने वाले भारत के दो ग्रंथ -श्रीमद भागवत गीता और रामायण में सारी समस्याओं के निदान,कठिनाइयों के समाधान और पुरुषार्थ से अभीप्साएं साकार करने के मार्ग उपलब्ध है ।प्रबल पुरुषार्थ में विश्व विजय के अनुकरणीय पृष्ठ निहित है।एक व्यक्ति महाशक्ति है।विष्णु पुराण में विराट विश्व को हथेली पर रखे भगवान ने यही समझाया है ,जैसे सम्पूर्ण विश्व मेरे नियंत्रण में है वैसे किसी भी मनुष्य के हो सकता है।मनुष्य के निर्माण में उन्हीं समस्त सामग्रियों,अवयवों और ऊर्जाओं का उपयोग किया गया है जिससे समय समय पर ईश्वर प्रगट होता है।विराट शक्ति केवल मेरे पास नहीं,मनुष्य के पास भी है।सबकुछ एकाग्रता और तप का प्रतिफल है।रचनात्मक शक्तियां ईश्वर ने मनुष्य की संरचना में सम्मिलित की है लेकिन मनुष्य कभी उन पर ध्यान ही नहीं देता ।ध्यान का महत्व ज्ञान से अधिक है क्योंकि ज्ञान से जिन उपलब्धियों तक पँहुचने के मार्ग मिलते हैं,ध्यान से वही मार्ग सहज बन निकट आते हैं।मनुष्य जितना संयत,सच्चरित्र,विनीत होगा सकारात्मक ऊर्जाएं उतनी ही उसकी सहयोगी होगी।समूचा विश्व तन्त्र इच्छाओं का प्रागट्य है।संचित कर्म ही भाग्य बन जाते हैं और जन्मों के संचित भाग्य प्रारब्ध और नियति बन समक्ष आ खड़े होते हैं।मनुष्य अपने ज्ञान,कौशल और पराक्रम का जितना परोपकार में उपयोग करता है उतना प्रारब्ध कटता जाता है ।गीता हमारे जीवन और मृत्यु दोनों को कल्याणमयी बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।रामायण जीवन के केंद्र में शुचिताओं का सम्मान करने के साथ परिस्थितियों पर अनुशासन,त्याग और विनम्रता से विजय पाने का पथ प्रशस्त करती है।एक दृढ़ आश्वस्ति केवल हमारी संस्कृति ही प्रदान करती है कि विपत्तियां अपने साथ पुरस्कार भी लेकर आती है।संघर्ष कठिन है तो प्राप्तियाँ भी अदभुत होती है।वनवास के साथ राज तिलकों का अवगुंठन है जैसे हर क्रिया के साथ प्रतिक्रिया जुड़ी है वैसे ही बीज के साथ वृक्ष और फल भी जुड़ा है।कर्म पाषाण पर उकेरी रेखा की तरह है।कर्म प्रधान विश्व रची राखा या यूं कहें कि कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।राम और कृष्ण दोनों का अनुनयन हमारे जीवन को पूर्ण बनाते हैं।हम नव वर्ष के गवाक्ष से अपने लिए समय की मुठ्ठी में क्या है देखना चाहते हैं।समय वही लाया है जो आपकी अभीप्सा है ।अभीप्साएं कर्म के बिना आकार नहीं लेती और कर्म ही है जो कतिपय को विशेष और उपेक्षित को विशिष्ट बना देता है।निश्चय प्रेम प्रतीति के,विनय करे सन्मान।तेहि के कारज सकल सुभ सिद्ध करे हनुमान।हनुमान चालिसा भी यही कहती है –निश्चय,प्रेम और विनम्रता के साथ कर्म का निर्वाह करने वाले मनुज के सारे कार्य हनुमान जी पूरे करते हैं।भारतवर्ष में आध्यात्मिक सम्पदा कण कण में समाहित है।लाखों वर्षों से सतत होते रहे तप ने इस भूमि को सुरक्षा कवच दिया है इसलिए संसार के अन्य देशों की तुलना में यहाँ विपदाएं कम है।वर्ष 2023 केतु के हाथ है।केतु अर्थात स्वप्न,आकांक्षाएं,अनुभूतियां और उड़ान।केतु मतलब आधार ,मूलाधार और श्री गणेश ।जो व्यक्ति अपनी बुनियाद का सम्मान करेगा उसका सदैव भला होगा ।आधार माता पिता फिर इष्ट।माता पिता के हाथों में इस साल की सफलता,सुख,शांति और कामनाओं पूरा करने वाला द्वार खोलने की चाबी दी है काल पुरुष ने।जिसे चाहिए सफलता उसे पकड़ना होंगें माता पिता के चरण।जो करता है माता पिता का नित्य तिरस्कार उसके पास कभी नहीं आती महालक्ष्मी,सरस्वती और भवानी की आशीष छाया ।शनि जैसा देव भी माता का सम्मान करता है।जो धर्म निहित जीवन जिएगा,धर्ममय आचरणों पर चलेगा, उसे मिलेगी काल पुरुष की कृपा।धर्म की रक्षा कीजिए,धर्म आपकी रक्षा करेगा ।
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रचनाकार

Author

  • त्रिभुवनेश भारद्वाज "शिवांश"

    त्रिभुवनेश भारद्वाज रतलाम मप्र के मूल निवासी आध्यात्मिक और साहित्यिक विषयों में निरन्तर लेखन।स्तरीय काव्य में अभिरुचि।जिंदगी इधर है शीर्षक से अब तक 5000 कॉलम डिजिटल प्लेट फॉर्म के लिए लिखे।

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